Tamannaah Bhatia: ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘बाहुबली’ का एक सीन काफी रहा है इस पर अभिनेत्री तमन्ना भाटिया ने हाल ही में चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने प्रभास के साथ फिल्माए गए उस सीन को लेकर बेझिझक अपनी बात रखी, जिसे लेकर काफी विवाद हुआ था।
तमन्ना भाटिया ने हाल ही में फिल्म ‘बाहुबली द बिगिनिंग’ के उस सीन को लेकर खुलकर बात की, जिसे लेकर काफी विवाद हुआ था। साल 2015 में रिलीज हुई इस फिल्म में प्रभास मुख्य भूमिका में थे। एक सीन में प्रभास, तमन्ना के कपड़े उतारकर उनका नेचुरल मेकअप करते हैं। इस सीन पर काफी आलोचना हुई थी और इसे लेकर एक आर्टिकल भी सामने आया था, जिसका शीर्षक था ‘अवंतिका का रेप’।
एक इंटरव्यू में तमन्ना भाटिया ने ‘बाहुबली’ के विवादित सीन पर बात करते हुए कहा, “जब लोग आपको कंट्रोल नहीं कर पाते, तो वे एक तरीका अपनाते हैं शर्म और गिल्ट का। वे आपको ये महसूस कराते हैं कि जो कुछ भी आप कर रहे हैं, वो गलत है और इसके लिए आपको शर्मिंदा होना चाहिए। जब वे आपको ऐसा महसूस कराने लगते हैं, तो उसी पल से वे आप पर हावी हो जाते हैं।”
तमन्ना भाटिया ने कहा, “जो चीज खुद में इतनी पवित्र होती है, लोग उसी को सबसे ज्यादा गलत नजर से देखते हैं। ऐसा नजरिया हमें यह महसूस कराता है कि हमें अपने जीवन के उस हिस्से को लेकर शर्मिंदा होना चाहिए, उसे छुपाना चाहिए, उस पर खुलकर बात नहीं करनी चाहिए। लोग अक्सर आपको यह अहसास दिलाना चाहते हैं कि आपने कुछ गलत किया है, जबकि वह तो जीवन की सबसे बुनियादी सच्चाई है जिसकी वजह से हम सब इस दुनिया में हैं। मुझे आज तक यह समझ नहीं आया कि जब कोई फिल्म डायरेक्टर का विजन होती है, तो लोग उसे लेकर क्यों जजमेंटल हो जाते हैं।”
तमन्ना भाटिया ने उस खास सीन को लेकर निर्देशक एस.एस. राजामौली का विजन भी साझा किया। उन्होंने बताया, “मुझे याद है जब राजामौली सर ने मुझे पूरा सीन समझाया था, तो उन्होंने कहा था कि वह एक दिव्य और खूबसूरत स्त्री है, जो अंदर से टूटी हुई है। उसके भीतर गहरा दर्द है। वह स्त्रीत्व से परिपूर्ण है और प्यार करना चाहती है, लेकिन जीवन में इतनी कठिनाइयों का सामना कर चुकी है कि अब वह अपने चारों ओर एक दीवार बना चुकी है। उसे लगता है कि उसे सबसे दूरी बनाकर रखनी चाहिए, ताकि कोई उसका फायदा न उठा सके। इसलिए वह किसी को अपने करीब नहीं आने देती। लेकिन इस सीन में एक लड़का है, जो उसे रिझाने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि उसे उसकी ही खूबसूरती का एहसास दिला रहा है।”
उस सीन के महत्व को लेकर तमन्ना भाटिया ने कहा, “अगर इसे विजुअली दिखाना हो, तो पूरा एक सीक्वेंस था जहां उसे बालियां पहनाई जाती हैं, बिंदी लगाई जाती है। फिर जब वह आईने में खुद को देखती है, तो पहली बार उसे एहसास होता है कि उसने हमेशा खुद को एक योद्धा के रूप में देखा है। उसने खुद को इतना कठोर और मजबूत बना लिया था कि उसकी मासूमियत और कोमलता कहीं खो गई थी। और यही वो पल था जब शिवा का किरदार उसे फिर से उसके असली रूप, उसकी असली पहचान से जोड़ता है।”
तमन्ना भाटिया ने कहा, “ये दरअसल लोगों का नजरिया होता है। हर कोई चीजों को अपने नजरिए से देखता और समझता है। आप चाहे दुनिया की सबसे पवित्र चीज ही क्यों न दिखाएं, अगर किसी की सोच यह है कि सेक्स या शरीर कोई गलत चीज है, तो वह उसमें भी बुराई ही देखेगा। फिल्ममेकर कुछ खूबसूरत दिखाना चाहता है, एक भावनात्मक अनुभव देना चाहता है, लेकिन अगर कोई उसमें कुछ और देखता है, तो वह उसकी सोच को दर्शाता है, न कि उस सीन को।”
