फिल्म इंडस्ट्री में अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए सैफ ने बताया कि उनका सफर बिल्कुल आसान नहीं था। भले ही वह एक नामी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता मशहूर क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी थे और मां अभिनेत्री शर्मिला टैगोर, लेकिन उनके करियर की शुरुआत संघर्षों से भरी रही। उन्होंने बताया, “मैंने सेकंड लीड, थर्ड लीड जैसी भूमिकाएं की थीं… कुछ फिल्में ठीक थीं, जिनसे गुज़ारा चलता रहा। लेकिन फिर एक ऐसा दौर आया जब लगातार बहुत ही खराब फिल्में मिल रही थीं।” उन्होंने 90 के दशक को अपना “नेट प्रैक्टिस” वाला समय बताया।
एक किस्सा साझा करते हुए सैफ ने बताया कि एक निर्माता उन्हें हर हफ्ते सिर्फ 1000 रुपये देती थीं, लेकिन हर बार पैसे देने से पहले वह शर्त रखती थीं कि सैफ को उनके गाल पर 10 बार किस करना होगा।
सैफ अली खान आखिरी बार फिल्म ‘ज्वेल थीफ’ में दिखाई दिए थे, जिसमें जयदीप अहलावत उनके साथ थे। यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई थी और इसका निर्देशन कूकी गुलाटी और रॉबी ग्रेवाल ने किया था। यह एक हीस्ट फिल्म थी जिसमें सैफ एक बिल्कुल अलग अंदाज़ में नज़र आए। इस फिल्म में सैफ और जयदीप की पहली बार जोड़ी बनी थी।
