Shakti Mohan : फिल्म इंडस्ट्री की चमक-दमक के पीछे एक सच्चाई छिपी होती है- यहां कामयाब होने की डगर आसान नहीं होती। हर दिन खुद को साबित करना पड़ता है और एक छोटी-सी गलती या चोट पूरे करियर पर भारी पड़ सकती है। लेकिन इस इंडस्ट्री में एक ऐसी शख्सियत भी हैं, जिन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया। कभी डॉक्टरों ने कहा था कि वह दोबारा अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाएंगी और आज वही मंच आकर बड़े-बड़े एक्टर्स को अपनी उंगलियों पर नचाती हैं और उनका नाम है- शक्ति मोहन।
आज शक्ति मोहन को देश की बेहतरीन डांसर्स में गिना जाता है, मगर उनकी सफलता का रास्ता काफी स्ट्रगल से भरा रहा है। उनके जीवन में एक ऐसा दौर आया था जब सब कुछ खत्म होता नजर आया, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत, जज्बे और हिम्मत से किस्मत की कहानी ही बदल दी।
साल 2010 में रियलिटी शो ‘डांस इंडिया डांस सीजन 2’ की विजेता बनकर शक्ति ने पहली बार पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। उनके कंटेम्पररी और जैज डांस स्टाइल ने दर्शकों और जजों दोनों को हैरान कर दिया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। फिल्मों, टीवी शोज और म्यूजिक वीडियोज में अपनी कोरियोग्राफी के जरिए उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई।
12 अक्टूबर 1985 को जन्मी शक्ति का बचपन आसान नहीं था। कम उम्र में ही वह एक दर्दनाक हादसे की शिकार हुईं, जिसमें उनके पैर पर काफी गहरी चोट लगी। डॉक्टरों ने परिवार को साफ कह दिया था कि शायद वह फिर कभी चल नहीं पाएंगी। यह सुनकर परिवार टूट गया, लेकिन उनकी मां ने उम्मीद नहीं छोड़ी।
शक्ति की मां ने इलाज के साथ-साथ उन्हें चलने और डांस सीखने के लिए प्रेरित किया। इसी दौरान शक्ति ने भरतनाट्यम की ट्रेनिंग लेना शुरू किया। शुरुआत में यह सिर्फ थेरेपी के रूप में था, लेकिन धीरे-धीरे यही उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा जुनून बन गया। लगातार प्रैक्टिस ने ना केवल उनके शरीर को मजबूत किया बल्कि उस पैर को भी ठीक कर दिया जिसे डॉक्टरों ने “अक्षम” बताया था।
इसके बाद शक्ति ने ठान लिया कि वह अपने डांस से खुद को साबित करेंगी। जब उन्होंने ‘डांस इंडिया डांस’ के लिए ऑडिशन दिया, तो वहां भी उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। वह घंटों तक भीड़ में खड़ी रहीं, भूखी-प्यासी, लेकिन हार नहीं मानी। उनके हौसले और मेहनत ने आखिरकार रंग दिखाया। शो में उनका सेलेक्शन हुआ और उनके अनोखे डांस ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी।
