Kis Kisko Pyaar Karoon 2 Review : आजकल की लाइफ में हर कोई तनाव में है। ऐसे में अगर आपको 2 घंटे ऐसे मिलते हैं जहां आप सब कुछ भूलकर बस हंसे और एंटरटेन हो तो क्या चाहिए। कपिल शर्मा अपने शो के बाद बड़े पर्दे पर भी एक बार फिर से हंसाने आए हैं और इस बार भी वो हंसा हंसकर आपका पेट दर्द कर देंगे।
कहानी
ये कहानी है मोहन यानि कपिल की जो हिंदू है। उसे अपनी गर्लफ्रेंड सानिया यानी हीरा वरीना से शादी करनी है जो मुस्लिम है। लेकिन इनके प्यार के बीच धर्म आ जाता है। हालात कुछ ऐसे बनते हैं कि मोहन की 3 और शादियां हो जाती है और वो भी अलग अलग धर्म में लेकिन क्या मोहन अपने प्यार को पा पायेगा, ये देखने आप थिएटर चले जाइए।
कैसी है फिल्म
ये फिल्म फुल ऑन फैमिली एंटरटेनमेंट है। आप दिमाग को घर पर फ्रिज में रिलैक्स करने छोड़ जायज लॉजिक को अपनी गर्लफ्रेंड के साथ डेट पर भेज दीजिए और बस हंसिए। कई बार हमें हंसने की बहुत जरूरत होती है, ये फिल्म आपको इतना हंसाएगी की आपके जबड़े दर्द करने लगेंगे,पेट में मरोड़ पड़ जाएंगे,फर्स्ट हाफ में मामला लव स्टोरी वाला ज्यादा लगता है लेकिन फिर सेकेंड हाफ में आप खूब हंसते हैं। डायलॉग्स मजेदार हैं,आपको कुछ न कुछ मैसेज भी मिलता है,फैमिली के साथ ये फिल्म आराम से देखी जा सकती है। हनी सिंह का गाना बड़े पर्दे पर देखकर अलग की मजा आता है। क्लाइमैक्स हैरान करता है और आप एक स्माइल के साथ थिएटर से बाहर आते है।
एक्टिंग
कपिल शर्मा टॉप फॉर्म में हैं। एक्टिंग में ये उनका अब तक का बेस्ट है. उनकी एक्टिंग में धार आई है और यहां तो वो अपने होम ग्राउंड पर खेल रहे हैं। कॉमेडी में उनका हाथ कोई वैसे भी नहीं पकड़ सकता, असरानी साहब की देखकर एक अलग ही एहसास होता है। विपिन शर्मा और अखिलेंद्र मिश्र की कॉमेडी फिल्म में एक अलग ही जान डालती है और ये दोनों वैसे भी कमाल के एक्टर है और यहां भी कमाल कर गए हैं। मनजोत सिंह ने बढ़िया एक्टिंग की है. कपिल के साथ उनकी जोड़ी खूब जमती है। हीरा वरीना का काम अच्छा है। त्रिधा चौधरी बहुत अच्छी लगी हैं और काफी इंप्रेस करती हैं.पारुल गुलाटी का कॉन्फिडेंस गजब है और उन्होंने काफी अच्छा काम किया है। आयशा खान ने अपना काम ईमानदारी से किया है।
राइटिंग और डायरेक्शन
अनुकल्प गोस्वामी की राइटिंग और डायरेक्शन बढ़िया है.उन्होंने एक ही चीज पर फोकस किया और वो है एंटरटेनमेंट और इसमें वो पूरी तरह कामयाब रहे।
कहां चूकी फिल्म?
फिल्म एक सिरे से बेसिर-पैर की कॉमेडी है जहां तर्क की तलाश बेमानी है। कई दृश्य घिसे-पिटे महसूस होते हैं, खासकर वे पल जहां दोनों पत्नियां मोहन से एक जैसे संवाद बोलती हैं ट्रेन पटरी पर जाकर जान देने की धमकी देना आदि। फिर भी बीच-बीच में कुछ संवाद चुटीले हैं और हंसी के क्षण गढ़ लेते हैं। फिल्म का एक सराहनीय पक्ष यह है कि मजाकिया घटनाओं के बीच यह सभी धर्मों के प्रति सम्मान और समानता का संदेश भी देने की कोशिश करती है। किन्नरों के नृत्य वाले दृश्य में हास्य और ऊर्जा दोनों हैं। हालांकि क्लाइमैक्स बहुत दमदार नहीं बन पाया है।
