Ikkis Casting Agastya Nanda : अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा की फिल्म ‘इक्कीस’ नए साल यानी 2026 के पहले दिन दिन सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है। सबसे कम उम्र के परमवीर चक्र विजेता अरुण खेत्रपाल रियल लाइफ की स्टोरी पर बनने वाली इस फिल्म का डायरेक्शन श्रीराम राघवन ने किया है। फिल्म में अगस्त्य नंदा लीड रोल में है और अरुण खेत्रपाल का रोल कर रहे हैं।
फिल्म ‘इक्कीस’ में दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र और एक्टर जयदीप अहलावत भी दिखाई देंगे। ‘इक्कीस’ धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म है। इस फिल्म से अक्षय कुमार की भांजी सिमर भाटिया बॉलीवुड डेब्यू करने जा रही हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस फिल्म में अगस्त्य नंदा को कास्ट करने की वजह क्या थी। इसका खुलासा फिल्म ‘इक्कीस’ के डायरेक्टर श्रीराम राघवन ने किया था।
अगस्त्य नंदा ने साल 2023 में नेटफ्लिक्स पर आई फिल्म ‘द आर्चीज’ से डेब्यू किया था। अब उनकी दूसरी फिल्म ‘इक्कीस’ आने वाली है और ये उनकी फर्स्ट फिल्म होगी जो सिनेमाघरों में रिलीज होगी। श्रीराम राघवन ने फिल्म ‘इक्कीस’ में अगस्त्य नंदा की कास्टिंग को लेकर कहा था कि उनको फिल्म ‘द आर्चीज’ से पहले फाइनल कर दिया था।
दरअसल, वह फिल्म के लिए नया चेहरा चाहते थे जो अरुण खेत्रपाल की तरह दिखता हो। श्रीराम राघवन ने कहा था, ‘मैं शुरूआत से बिल्कुल क्लियर था कि मुझे फिल्म के लिए नया फेस चाहिए जो सच में अपनी उम्र का नजर आए। मैं ऐसा एक्टर नहीं चाहता था, जिसके चेहरे पर पहले से अनुभव दिखें। जब मैं पहली अगस्त्य नंदा से मिला तो मुझे नहीं पता था कि मेरी उनसे मुलाकात होने वाली है। दिनेश विजान ने मुझे ऑफिस बुलाया और कहा कि किसी से मिल लो। हमने कोई प्रॉपर कोई ऑडिशन नहीं किया। हमने सिर्फ बात की। ‘
जज्बे की तारीफ
श्रीराम राघवन ने बताया था, ‘जब मेरी मुलाकात अगस्त्य नंदा से हुई तो उसके चेहरे पर हल्की दाढ़ी थी और वह मुझे 60-70 के दशक के यंग अमिताभ बच्चन जैसे लगे। वह वो दौर था जब अमिताभ बच्चन की फिल्में फ्लॉप हो रही। थीं लेकिन वह निराश नहीं हुए और लगातार काम करते रहे। वही कच्चापन, वही अनगढ़ सच्चाई। मुझे वही क्वालिटी चाहिए थी। मैं किसी ट्रेनिंग वाले आर्टिस्ट की तलाश में नहीं था। मुझे ऐसा लड़का चाहिए था, जो कहानी के साथ आदमी बन सके। ‘
श्रीराम राघवन ने अगस्त्य नंदा के साथ काम करने को लेकर को बताया था, ‘मेरे लिए सबसे बड़ी बात थी कि वह करने के लिए तैयार था। उन्होंने जबरदस्त परफॉर्मेंस के साथ काफी मेहनत की। उसे किरदार को जीना था। फिल्म की शूटिंग के दौरान कई बार टैंक के अंदर जाना होता था और बाहर आना होता था और ये काम आसान नहीं था। उसने इस काम को कई बार किया ताकि वह सहज हो सके। उसने कभी शॉर्टकट नहीं खोजा। एक समय के बाद एक्टिंग और रियलिटी के बीच का लाइन मिट जाती है। जब सेना की कहानी बताते हैं तो ऑफिसर लायक क्वालिटी का होना बहुत जरूरी है और ये मैंने अगस्त्य नंदा में देखा। ‘
