Sholay Spelling : सुपरहिट फिल्म ‘शोले’ आज भी दर्शकों को उतनी ही पसंद है, जितनी अपनी रिलीज़ के समय थी। इसके पीछे की एक नहीं बल्कि कई वजह है, क्या आप जानते हैं कि इस फिल्म के रिलीज से पहले डायरेक्टर रमेश सिप्पी ने फिल्म के टाइटल की स्पेलिंग के साथ एक जोखिम भरा दांव खेला था। रमेश सिप्पी ने एक इंटरव्यू में इस आइकॉनिक नाम (Sholay) के पीछे की दिलचस्प कहानी और उसकी वजह का खुलासा किया था।
रमेश सिप्पी से जब फिल्म के टाइटल ‘शोले’ को लेकर सवाल पूछा गया तो, उन्होंने इसके पीछे की दिलचस्प कहानी बताई, उन्होंने कहा कि ‘शोले का मतलब आग नहीं, चिंगारी है।’ उन्होंने फिल्म की कहानी का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें ठाकुर (संजीव कुमार) है। जिसका पूरा परिवार खत्म हो जाता है। उसके दोनों हाथ काट दिए गए होते हैं। ठाकुर अपने इंतकाम को पूरा करने के लिए दो लोगों (जय और वीरू) को हायर करता है, जो उसके बदले को पूरा करने में उसकी मदद करते हैं। यह इंतकाम की चिंगारी ही फिल्म का मूल भाव था।
टाइटल की स्पेलिंग में खेला गया बड़ा दांव
इस दौरा रमेश सिप्पी ने बताया कि टाइटल फाइनल करने के दौरान उन्हें एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा, ‘जब हमने टाइटल रखने का फैसला किया, तो पहले एक फिल्म बनी थी बी.आर. चोपड़ा साहब की, जिसका टाइटल भी शोले था, लेकिन उसकी स्पेलिंग S-H-O-L-E थी। ‘ उन्होंने आगे बताया कि हमने सोचा कि हमारी फिल्म का टाइटल उस फिल्म से अलग दिखना चाहिए, इसलिए हमने इसमें एक एक्स्ट्रा ‘A’ जोड़ दिया। उन्होंने बताया कि इस S-H-O-L-A-Y स्पेलिंग का एक और कारण था। ‘LAY’ जिसमें कोई दूसरी प्रोनॉन्सिएशन नहीं होगी।
बहरहाल, रमेश सिप्पी के इस छोटे से बदलाव (सिर्फ एक अक्षर का), उस फिल्म के इतिहास को बदल गया। जिसे आज हर सिने लवर भारतीय जानता है। ‘शोले’ न केवल सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर बनी, बल्कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में S-H-O-L-A-Y स्पेलिंग हमेशा के लिए अमर हो गई।
